कन्हैया तुम्हे एक नजर देखना है मृदुल कृष्ण शास्त्री भजन लिरिक्स

0
996
बार देखा गया
कन्हैया तुम्हे एक नजर देखना है मृदुल कृष्ण शास्त्री भजन लिरिक्स

कन्हैया तुम्हे एक नजर देखना है,
जिधर तुम छुपे हो उधर देखना है।।

अगर तुम हो दीनो के आहो के आशिक
तो आहो का अपना असर देखना है,
जिधर तुम छुपे हो उधर देखना है,
कन्हैया तुम्हे एक नजर देखना है।।

उबारा था जिस हाथ ने गिद्ध गज को,
उसी हाथ का अब असर देखना है,
जिधर तुम छुपे हो उधर देखना है,
कन्हैया तुम्हे एक नजर देखना है।।

विधुर भीलनी के जो घर तुमने देखे,
तो हमको तुम्हारा भी घर देखना है,
जिधर तुम छुपे हो उधर देखना है,
कन्हैया तुम्हे एक नजर देखना है।।

टपकते है द्रग बिंदु तुमसे ये कहकर,
तुम्हे अपनी उल्फत मे तर देखना है,
जिधर तुम छुपे हो उधर देखना है,
कन्हैया तुम्हे एक नजर देखना है।।

कन्हैया तुम्हे एक नजर देखना है,
जिधर तुम छुपे हो उधर देखना है।।

आपको ये भजन कैसा लगा? हमें बताए।

आपकी प्रतिक्रिया
आपका नाम