मैं बालक तु माता शेरावालीये है अटूट यह नाता शेरावालिए

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मैं बालक तू माता शेरावालिए,
है अटूट यह नाता शेरावालिए।। 
शेरावालिए माँ, पहाड़ा वालिए माँ,
मेहरा वालिये माँ, ज्योतां वालिए माँ ॥

तेरी ममता मिली है मुझको, तेरा प्यार मिला है,
तेरे आँचल की छाया में मन का फूल खिला है ।
तुने बुद्धि, तुने साहस, तुने ज्ञान दिया, 
मस्तक ऊँचा करके जीने के वरदान दिया माँ ।
तू है भाग्य विधाता शेरावालिए
मैं बालक तू माता शेरां वालिए

जब से दो नैनो में तेरी पावन ज्योत समायी,
मंदिर मंदिर तेरी मूरत देने लगी दिखाई ।
ऊँचे पर्वत पर मैंने भी डाल दिया है डेरा,
निस करे जो तेरी सेवा मैं वो दास हूँ तेरा ।
रहूँ तेरे गुण गाता शेरावालिए
मैं बालक तू माता शेरां वालिए ॥

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