रिध्दि सिध्धि के दाता सुनो गणपति भजन लिरिक्स

4
2242
बार देखा गया

रिध्दि सिध्धि के दाता सुनो गणपति,
तर्ज
हाल क्या है दिलो का ना पूछो सनम
श्लोक
सारी चिंता छोड़ दो चिंतामण के द्वार ,

बिगड़ी बनायेंगे वही विनती कर स्वीकार ,

बड़े बड़े कारज सभी पल मे करे साकार ,

बड़े गणपति का है साथ सच्चा ये दरबार ,

सिध्द हो हर कामना सिध्दिविनायक धाम ,

खजराना मे आन बसे मेरे शिव गौरी के लाल॥


रिध्दि सिध्धि के दाता सुनो गणपति ,

आपकी मेहरबानी हमें चाहिये ,

पहले सुमिरन करूँ गणपति आपका ,

लब पे मीठी सी वाणी हमें चाहिये ,

रिध्दि सिध्धि के दाता सुणो गणपति ॥


सर झुकाता हूँ चरणों मे सुन लीजिये ,

आज बिगड़ी हमारी बना लीजिये ,

ना तमन्ना है धन की ना सर ताज की ,

तेरे चरणों की सेवा हमें चाहिये ,

रिध्दि सिध्धि के दाता सुणो गणपति ॥


तेरी भक्ति का दील मे नशा चूर हो ,

बस आँखो मे बाबा तेरा नूर हो ,

कण्ठ पे शारदा माँ हमेशा रहे ,

रिध्धि सिध्धि का वर ही हमें चाहिये ,

रिध्दि सिध्धि के दाता सुनो गणपति ॥

www.bhajandiary.com 


सारे देवों मे गुणवान दाता हो तुम ,

सारे वेदों मे ज्ञानो के ज्ञाता हो तुम ,

ज्ञान देदो भजन गीत गाते रहे ,

बस यही ज़िन्दगानी हमें चाहिये ,

रिध्दि सिध्धि के दाता सुनो गणपति ॥

रिध्दि सिध्धि के दाता सुनो गणपति
रिध्दि सिध्धि के दाता सुनो गणपति

4 टिप्पणी

कोई जवाब दें

आपकी प्रतिक्रिया
आपका नाम