तेरा दर तो हकीकत में दुखियों का सहारा है

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तेरा दर तो हकीकत में, दुखियों का सहारा है,
सच कहता हूँ माँ मेरी, तेरे दर से गुजारा है ।

बिगड़ी हुई तकदीरें बन जाती है एक पल में,
जिस वक़्त मुसीबत में भक्तों ने पुकारा है ।
तेरा दर तो हकीकत में। 

तेरे दर को छोड़ मैया जाएं तो कहाँ जाएं,
सच कहता हूँ दर तेरा जन्नत का नज़ारा है ।
तेरा दर तो हकीकत में। 

दौड़े चले आते हैं दुःख दर्द के मारे यहाँ,
सुख चैन वही पाते हैं जिन्हें तेरा इशारा है ।
तेरा दर तो हकीकत में। 

मुझ को इस दुनियां में, सब पागल कहते हैं,
मेरा मुझमे तो कुछ भी नहीं,ये सब कुछ तुम्हारा है ।
तेरा दर तो हकीकत में। 

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