थाने विनती करू बारम बार सोबतरा मैया अरज सुनो

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थाने विनती करू बारम बार सोबतरा मैया अरज सुनो

थाने विनती करू बारम बार,
सोबतरा मैया अरज सुनो।।



हा जबर जालोर री नून नगरी,

नदी री खडले धाम,
दूर दूर सु आवे जातरू,
लुल लुल करे प्रणाम,
सोबतरा मइया अरज सुनो,
थाने विनती करूँ बारम बार,
सोबतरा मैया अरज सुनो।।



नव नोरते मेलो लागे,

आवे नर ने नार,
मावड़ी आवे नर ने नार,
गिरत मिठाई साड़े सुरमा,
सेडा बंदी करे रे जवार,
सोबतरा मइया अरज सुनो,
थाने विनती करूँ बारम बार,
सोबतरा मैया अरज सुनो।।



अरे ढोल रे नगाड़ा वाजे,

नोपत्तो जालर रो जनकार,
मावड़ी जालर रो जनकार,
अरे शाम सवेरे होवे आरती,
नित रे माँ थारोडे दरबार,
सोबतरा मइया अरज सुनो,
थाने विनती करूँ बारम बार,
सोबतरा मैया अरज सुनो।।



हा लिखे जोरावर महिमा बखानी,

धरे आपरो धयान,
मावड़ी धरे आपरो धयान,
‘महेंद्र प्रजापत’ गावे भाव सु,
रखियो नगरी में मारो मान,
सोबतरा मइया अरज सुनो,
थाने विनती करूँ बारम बार,
सोबतरा मैया अरज सुनो।।



थाने विनती करू बारम बार,

सोबतरा मैया अरज सुनो।।

– गायक एवं प्रेषक –
महेंद्र प्रजापति नून
Ph 8608590609


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