जय हो रणबांकुरो की,
मरुधर के शुर वीरों की,
दिल में थी जिनके माँ भारती,
वीरों की रुमझुम उतारे हम आरती।।
तर्ज – अम्बे तू है जगदम्बे काली।
हिन्द देश के वीरों ने,
भारत का मान बढ़ाया,
इस पुण्य भूमि से दुश्मनों का,
वीरों ने किया सफाया,
वो भागे वीरों की हुंकारों से,
तीरों ओर तलवारों से,
दुश्मन के शिश वो उतारती,
वीरों की रुमझुम उतारे हम आरती।।
इतिहास के स्वर्णिम पन्नो पर,
लिखी ये गौरव गाथा,
शूरवीरो के चरणों में हम,
झुकाए गर्व से माथा,
ऐसी जननी को है वन्दन,
शूरवीर है जिनके नंदन,
दुनिया ये तन मन वारती,
वीरों की रुमझुम उतारे हम आरती।।
गिरी सुमेल संग्राम में,
युद्ध लड़े कई वीर,
जेता जी कूपा जी के धड़,
लड़े थे बिना सिर,
श्री अखेराज खीमकरण जी,
अंत तक छोड़ा न रण जी,
धरती ये खून की होली खेलती,
वीरों की रुमझुम उतारे हम आरती।।
भक्ति भाव अर्पित करते है,
देश के इन वीरों को,
मातृभूमि पर शहीद हुए,
भारत के कोहिनुरो को,
राधेश्याम ये आरती गाये,
दिलबर हम शिश झुकाये,
देश प्रेम की ज्योत जगावती,
वीरों की रुमझुम उतारे हम आरती।।
जय हो रणबांकुरो की,
मरुधर के शुर वीरों की,
दिल में थी जिनके माँ भारती,
वीरों की रुमझुम उतारे हम आरती।।
गायक – कन्हैया वैष्णव हैदराबाद।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’।
नागदा जक्शन म.प्र. 9907023365
प्रेषक – श्री राधेश्याम जी वैष्णव।
गांव गिरी (राजस्थान)