तीन रूप महामाई विराजी,
धाम सिरोंज कहाता है,
मध्य प्रदेश की पावन धरती,
हर कोई शीश झुकाता है।।
एक ओर मां महासरस्वती,
दूजी ओर महालक्ष्मी है,
मूरत मध्य महागौरी जी,
कहलातीं महामाई है,
कहलातीं महामाई है।।
नलिनीकान्तजी भोग लगावें,
उमाकांत जयकारे गावें,
लक्ष्मीकांत पर भई तो,
महाकाली जी आन विराजें,
महाकाली जी आन विराजें।।
मनवांछित फल देती मैया,
इनकी महिमा अपरम्पार,
सच्चे मन से जो कोई मांगे,
भर जाते उसके भंडार,
भर जाते उसके भंडार।।
तीन रूप महामाई विराजी,
धाम सिरोंज कहाता है,
मध्य प्रदेश की पावन धरती,
हर कोई शीश झुकाता है।।
Singer – Dinesh Kushwah
9229285857