डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन भजन लिरिक्स

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डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन भजन लिरिक्स

डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन,
सांझ भई मन्दिर में डूब चलो दिन।।

काहे के मैया दिवला बनो है,
काहे के डारि डोर मोरी मैया,
डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन।।

सोने के मैया दिवला बनो है,
रुबा की डारि डोर मोरी मैया,
डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन।।

कौना सुहागन दिवरा जरावे,
कौना ने डारि डोर मोरी मैया,
डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन।।

सीता सुहागन दिवरा जरावे,
रामा ने डारि डोर मोरी मैया,
डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन।।

काहाँ बनी मोरी माई की मढ़ैया,
कौन है रखवारी मोरी मैया,
डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन।।

ऊँची पहड़िया बनी माई की मढ़ैया,
लंगुरे है रखवारी मोरी माँ,
डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन।।

कुमर सुमर माई तोरे जस गावे,
मैया लगा दो पार मोरी मैया,
डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन।।

डूब चलो दिन माई डूब चलो दिन,
सांझ भई मन्दिर में डूब चलो दिन।।

राकेश तिवारी के,
इस भजन को सुनकर,

बचपन की याद आती है !
जब शाम को दूर किसी मंदिर के,
में ये सुनाई देता था। 🙂  

आपको ये भजन कैसा लगा? हमें बताए।

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